Karni Mata mandir ki itihas | Karni Mata Temple History in Hindi 2021

Karni Mata की मंदिर भारत की राजस्थान राज्ज में स्थित उदैपुर पुर में स्तिथ हा. यह मंदिर राजस्थान के मंदिर में से यह काफी पुराना और रहस्यमय हा. करणी माता का यह मंदिर बिकनर से ३० किलोमीटर की दुरी में मचला पहाड़ में स्तिथ हा. यह मंदिर की देवी माता करनी देवी जोधपुर जिला की सुपाप गांव में सन १३८७ चरण राजपूत बंश्म की सातवी लड़की की रूप में जनम ली थी.

माता की असली नाम हा रिधू बाई. रीडू बाई की शादी सटीक गांव की देपोजी चरण की साथ होई थी, मगर सांसारिक लत ख़त की वजा से माता में संसार चोर कर के जजाबर जैसा घुमने लगी थी. एइसाही घूमते घूमते देशनोक नाम की एक गांव पौची थी और वहा पे ही स्थायी रूप से रहेने लगी थी. वाद में करणी माता का मंदिर देशनोक में माता जी की मंदिर भी बनाया गया था.

करणी माता का मंदिर चूहा की मंदिर के नाम से भी जाना जाता हा. येह आपको २५००० से भी जायदा चूहा देखने को मिल जायेगा और यह जगह कब्बस नाम से जाना जाता हा. माता की बेहेन की  चार पुत्र था और उनमे से सबसे लाडला था छोटे पुत्र लाक्स्मन. कहा जाता हा की येह लाक्स्मन पानी पिने के लिए कपिल सरबर नाम की एक जलधर में आये थे और पानी पीने के समय उसी सरबर में गिरके मितु पाप्त हो गया था.

उसके वाद करनी माता की काफी अर्जी के वाद यमराज उनके पूत को चूहा की रूप में पुनर्जनम की अनुमोती प्रदान किया था. यह कब्बस काफी पबित्र स्थान की हिसाब सी जाना जाता हा और येह दर्शानात्री दोआरा चूहा ओ को मिठाई खिलाया और पानी पिलाया जाता हा.

माता की बहेन की चार पुत्र था और उनमे सी हर कोई माता की एक एक महीना कर के सेवा करते थे. आज भी ओ परंपरा बरक़रार हा. माता की यह मंदिर रजा गंगा सिंह ने बनाया था. और संबत १५९५ चैत्र सुक्ल में माता की जोतिलिंग हुआ था. और ठीक चार दिन वाद से वहा माता की पूजा सुरु हो गया था. करणी माता दुर्गा माता की अवतार हा. एहा माता जी की गुफा हा, और ईसी गुफा में माँ की मानब मूर्ति थापन कीया गया था.   

करणी माता की चूहे वाला मंदिर में इतने सरे चूहे देखा जाता हा मगर एहा आपको बदबुओ की अहेसास भी नही होगी. और इस मंदिर की एक खास बात हा, एहा की प्रसाद खाने की वाद एक भी दर्शंयारती बीमार नही हुए. कहा जाता हा की यह चूहे कोई दर्शालू की पएर को छु ले तो काफी सुभ माना जाता हा. हा और एक बात, एहा पे रहेने वाले काले चूहे में कुछ सफ़ेद चूहे भी मजुत हा और ओ चूहे का दर्शन हो गया तो दर्शन यात्री ओ की  मनस कमाना जरुर पूरी होती हा.

करणी माता की मंदिर कैसे जाये

अगर आप भारत की कोई भी कोने से देशनोक की करणी माता मंदिर के दर्शन करने के लिए आना चाहते हो तो अप्लोगोको पहेले बिकनर नही तो उअदैपुर आना पड़ेगा. उसके वाद उदयपुर नही तो बिकनर से अपलोगो को लोकल बास नही तो टैक्सी पकड़ के मंदिर तक आना प्रेडेगा.

करणी माता मंदिर की खासियत

Karni Mata

करणी माता मंदिर देशनोक की कई सरे खासियत हा उनमे से कुछ खास बाते के वारे में जानकारी देना चाहूँगा.

पहेला नंबर में आता हा मंदिर के करुकार्य. मंदिर की दिवार और फर्स पर वाना हुआ सदियों पुराने करुकार्य देकने को मिल जाता हा जो पर्यटकों के मन में एक अलग ही पहेचन वाना देता हा इस मंदिर की.

और दूसरा हा यहा एक साथ २५००० से भी जायदा चूहे देकने को मिल जायेगा अक साथ. माता करणी की मंदिर के आस पास यह चूहा घूमते रहेते हा. आज माता की मंदिर में यह चूहा को भगवन का दर्जा दिया जाता हा. यह माता का मंदिर दर्शन करने के लिए भारत की हर कोना से दर्शन यात्री ओ का भीड़ लगा रहेता हा. और एक खास बात हा, येह पे आने मवाले दर्शन यात्री साथ में दूध और मिठाई भी लेट हा उन चूहे को खिलने और पिलाने के लिए.

Karni Mata Temple Timing

करनी माता मंदिर के बारे में जानने के लिए आपको यह मंदिर की दर्काशन करना पड़ेगा. करणी माता मंदिर बीकानेर की समय सुरु होता हा सुबह ४ बजे से और बंद होते हा रात १० बजे. इस मंदिर की दर्शन करने के लिए कोई टिकेट का जरुरत नही पड़ता हा.

करणी माता मंदिर की उत्सब

करनी माता मंदिर की देखवाल करने वाला कमिटी द्वारा परिचालित एक मेला का इन्तेजाम कीया जाता हा. यह मेला साल में दो वर आयोजन किया जाता हा नवरात्रि के समय. एक बार मार्च से अप्रैल मेहेना की बित्च चैत्र सुकला एकम से चित्र सुकला दशमी तक. और एक वर सितम्बर मेहेना से अक्टूबर मेहेना के बिच आश्विन सुकला एकम से आश्विन सुकला दशमी तक. यह दो समय में माता के मंदिर  में भक्तो ओ का भीड़ काफी हद तक बड जाता हा.

देशनोक करणी माता मंदिर मंदिर घुमने का सही समय

देशनोक करणी माता का मंदिर घुमने के लिए कोई खास समय नही होता हा. यह वाली माता मंदिर हर दिन के लिए खास हा. रोजाना मंदिर में दर्शन यात्री की भीड़ से मंदिर खुल ते हा और सुबह और शाम को मंगल आरती तो इस मंदिर का सोभा और वडा देते हा. फिर भी अप्लोगोको कोई खास समय की वारे में जानना हा तो आपलोग मेला के समय यह राजस्थानी माता की मंदिर दर्शन कर सकते हो.

माँ की दर्शन करने के वाद कहा रुके ?

माता की दर्शन के वाद सर्धौलू के लिया एक बिशाल आकार धर्मशाला बनाया गया हा. इसके इलावा आपलोग बिकनर या जोधपुर में भी रुक सकते हा.

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