Badrinath Dham के बारे में हिंदी में जानकारी | 2021

नमस्कार दोस्तो आज में अप्पको Badrinath Dham के बारे में अधिक से अधिक जानकारी प्रदान करने वाला हु. आज में आप लोगोको बद्रीनाथ धाम कैसे जाये, कहा रुके, कितना खर्चा आएगा, कितना दिन का समय लगने वाला हा इस ट्रिप के लिए और कोण सा समय सही रहेगा यह यात्रा करने की लिए.

Badrinath Dham history in Hindi

भारत की उत्तर दिशा में हिमालय की बरफ से धाकी पर्वत शिन्खालायो की गोद में वसा पबित्र धाम बद्रीनाथ समस्त हिन्दू जाती के लिए परम पुजोनिया तीर्थस्थान हा.

येह की यात्रा बहती कठिन होता हा. पहेले तो और भी कठिन थी, मगर आज कल सड़क बन जाने की कारन आप लोग बाहन दोआरा येह आसानी से पाउच सकते हो.

हिन्दू धरम की धारर्मक गन का यह धाम के उपोर इतना आस्ता हा की बहती कतिनायी का सामना करने के वाद ही यह जगह दर्शन करने के लिए पाउच जाते हा. यह जगह केबल शर्धलुयो के लिए नही यह जगह प्रकिरिती प्रेमियों के लिए ही एक सर्ग उदान हा.

यह जगह में अक समय बद्री की बेसुमार झाडिया थी, इसलिए इसे बद्री बन भी कहा जाता हा. एहा आपलोगों को गरम और ठंडी पानी की स्रोत भी देखने को मिल जायेगा.

कहा जाता हा की एक समय इस झड़ी में शंकर आचार्य नाम की एक साधू की वास था और उनो ने ही इस जगह को बदिरिनाथ नाम कारन किया था. उन्हें छोड़ के बेयास मुनि की जनम भी ईसी बद्री बन में हुआ था. और येह पे बेयास मुनि एक आश्रम भी स्थापन किया था. इसलिए बेद बेयास को बादरायण भी कहा जाता हा.

इस अधर पे ही मुख मंदिर का नाम भी बद्रीनाथ पड़ा. भारत का बड़े बड़े सधुयो ने उत्तराखंड की इस भूमि को देब्तायो और पप्रक्र्तियो की मिलन स्त्स्ल मन हा. कहा जाता हा की अदि युग में नार और नारायण ने, त्रेता जुग में भगवन राम ने, दोपोर जुग में बेद बेयास और कलि युग ने शंकर आचार्य ने बद्री नाथ धाम में धरम और संस्कृति की प्रचार किया था.

बोध धरम की स्थापना की वाद चीन ने भारत पर आक्रमण कर दिया था और बद्रीनाथ धाम को नस्त भस्त कर दिया. और चीन Badrinath Dham में स्तापित ब्रिष्णु मूर्ति को नारद कुंद में डाल दिया था.

उसके वाद शंकर आचार्य ने हिन्दू धरम की पुनर उठान की क्रम में उस प्रतिमा को फिर नारद कुंद से निकल के गरुण गुफा में स्थापित किया. चन्द्र बंशी गरवाल नरेश ने येह मंदिर का निर्माण किया और उस मंदिर पर इंदौर की महा रानी अहलिया वाई ने सोने का शिखर चाडाया.

भारत की दक्षिण दिशायो में स्थित केरल की नाबुन्दारी पटरावन ब्रम्भन ही इस प्रतिमा को छु सकते हा. और तथा ओडिशा की पूरी जग्गनाथ टेम से वाना हुआ कड़े Shri Badrinath Dham में चड़ाए बिना भारत की तीर्थ यात्रा पूरी नही होती हा.

सर्धयुलू के एसे मान्यता हा की ल माता लाख्स्मी जी येह भोजन पाकाती हा और नारायण जी पोरोस्ते हा. येह सभी धरम और जाती के लोग एक पात्र में बेठ के प्रसाद ग्रहण करते हा.

यात्रा और धार्मिक दिन से बद्रीनाथ की बिसेस महत्ता इसलिए भी हा के यह भारत की सबसे प्राचीन मंदिर हा. इस धाम के स्थापना सत्य युग में हुयी. कहा जाता हा की येह पूजा करने से मानब पुनर जनम की बन्धनों से मुक्त हो जाता हा.

Badrinath Dham में नार और नारायण नाम की दो परबत शिखर हा और इस के बिच येह की मुख मंदिर स्तिथ हा. मंदिर की पृष्ट भूमि में उची नील कंठ की चोटी बरफ से धाकी हुयी देखी देते हा.

बद्रीनाथ भगवन ब्रिष्णु की मंदिर हा और यह मंदिर अलोक नदी नदी की डैने तट पर स्तिथ हा. पथोरो से बने इस मंदिर की उचाई लगभग मीटर हा और जिसके उपोर तिन स्वर्ण कलश चमकते रहेते हा. इस मंदिर की बाहरी दुआर सिंध दुयर के नाम से जाना जाता हा.

इस मुख मंदिर के दो भाग हा. प्रथम भाग में गरूर , हनुमान और लक्ष्मी जी के छोटे छोटे मंदिर स्थापित हा. और दुसरे भाग में श्री बद्री नारायण जी की काले पत्थर से निर्मित चतुर्भुज प्रतिमा हा और इसके मस्तक पर एक बड़ा हिरा जुरा हुआ हा. ईन मूर्ति की अगल बगल में नारायण, नर, र्कुबेर, उदध और नारद की मूर्ति या स्थापित हा.

मंदिर के दूसरा हिस्सा ही मुख्य बेदी हा जहा मानब पूजा अर्चना करते हा और बिस्वास रकते हा की येह पूजा करने से पुनर जनम की बंधन से छुट करा मिल जाते हा. और यह मंदिर भारत की चार पबित्र धमो में से एक हा.

Badrinath Dham Kahan hai?

भारत की उत्तर दिशा में उत्तराखंड राज्ज में हिमालय की गरवाल खेत्र में समुद्र तल से लगभग ३१२२ मीटर की उचाई में लाख्स्मन गंगा और अलोक नंदा की संगम स्थल में यह पूर्ण हमी स्तिथ हा.

Badrinath Dham Darshan के सही समय | Badrinath Dham opening date

Badrinath Dham उत्त्रखन की उची चोटियों में होने के कारन साल हर येह जाना मुस्किल हो जाते हा. यह मंदिर का Badrinath Dham opening date कुछ पहेले से तय नही होता हा, फिर ही आप मान के चलो मई की पहला हप्ता से. यह मंदिर के दौर हर साल की मई मेहेना से ले के नवम्बर महिना तक खुला रहेता हा. बाकि समय अधिक ठण्ड होने की कारन इस मंदिर के दरवाजा बंद रहेते हा.

Badrinath Dham कैसे जाये?

Badrinath Dham

अगर आप यह धाम की यात्रा व्कारने चाहते हो तो आप को ससे पहेल उत्तराखंड में स्तिथ हरिदुअर, ऋषिकेश नही तो देहेराडून आना पड़ेगा. वैसे तो जायदा से जायदा सर्धालू ऋषिकेश और हरिदुअर होक Badrinath Dham जाना पसंद करते हा. यह दोनों जगह जाने के लिए आप लोग बस और ट्रेन दोनों का ही सफ़र तय कर सकते हो.

अगर आप हवाई जहाज से आना चाहते हो तो आप को आना पड़ेगा देहेराडून का जोल्य्ग्रंद हवाई अड्डा. इस हवाई अड्डा से ऋषिकेश से २६ किलोमीटर की दुरी में स्तिथ हा.

आप बात करते हा के हरिदुअर और ऋषिकेश से आप लोग सबसे सस्ते में कैसे बद्रीनाथ धाम पौचेंगे. येह से बद्रीनाथ जाने का ससे सस्ता साधन हा बस. हरिदुअर में अप्प लोगोको सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह की बुश मिल जाता हा. येह से Badrinath Dham की दुरि ३१५ किलोमीटर हा और यह दुरी बस से तय करने में १०-१२ घंटा की समय लग जाता हा.

बस से जाने के लिए आपको ५००-६०० रूपया देना पड़ेगा. बस का टिकेट बस स्टैंड में काउंटर से मिल जाता हा और नही तो आप ट्रेवल एजेंसी दौरा भी बुक कर सकते हो. अगर आप को बद्रीनाथ के लिए सीधा बस न मिले तो आप लोग जोशी मैथ तक का बस ले लीजिये गा. जोशी मैथ से बद्रीनाथ के दुरी लग हग ४५ किलोमीटर हा और येह से आप जन प्रति १०० रूपया खर्च करके टैक्सी दौरा आराम से पाउच सकते हा.

बस के एलवा आप अगर टैक्सी से जाना चाहते हो तो उसकी भी सुविधा उपोलोव्ध हो जायेगा. टैक्सी से जाने के लिए एक गारी का किराया लगभग ६०००-७००० की बिच होते हा.

Hotels in Badrinath Dham

सुबह बस पकड़ने से आप शाम तक Badrinath Dham पाउच जायेंगे. उसके वाद रात को आप अद्रिनाथ में आराम कर सकते हो. आराम करने के लिए बद्रीनाथ में आपको बहुत सरे होटल, अस्राम और दोर्मेतोरी मिल जायेगा.

आश्रम की किराया आपको जन प्रति 200 रूपया के आस पास आयेगा. अगर आप अकेला जा रहे हो तो आप दोर्मेतोरी में भी रुक सकते हो. दोर्मेतोरी का किराया जन प्रति १०० रूपया आएगा.

अगर आप प्राइवेट होटल में रुकना चहेते हो तो आप रूम प्रति दिन का हिसाब से ५०० से लेकर ५००० रूपया में मिल जायेगा.

Baba Badrinath Dham यात्रा के दौरान कुल कितना खर्चा आएगा?

आप भारत की किसी ही कोना से आन चहेते हो तो एहा आ सकते हो. मगर में आज एहा ऋषिकेश/ हरिदुअर से आने जाने, रहेना और खाने की खर्चा की बारे में वातने वाला हु.

१. बस से आने जाने का खर्चा = ६०० X २ = १२००.

२. रहेना ( ३ दिन का होटल ) = ८०० X ३ = २४००.

३. खाने का खर्चा दिन प्रति = ३००X ३ = ९००.

कुल मिलाके ऋषिकेश या हरिदुअर से लगभग ५००० रूपया के करीब खर्चा आएगा.

अधिक जानकारी के लिए आप लोग हमे ईमेल दुआर कांटेक्ट करके जन सकते हो.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *